एक लड़का अपनी

गर्लफ्रेंड से बहुत प्यार करता था…

एक दिन उसने अपनी गर्लफ्रेंड से कहा,

तुम मेरे बिना 1 दिन बिता के दिखाओ..

गर्लफ्रेंड ने अपने बाय्फ्रेंड के बिना

एक दिन बिताया ओर वो जीत गयी..

दूसरे दिन बड़ी ही खुशी से वो

अपने बाय्फ्रेंड से मिलने गयी..

पर वो मर चुका था

क्यूंकी उसे केंसर था,

और उसके पास एक ही दिन बचा था.

उसने लेटर मे लिखा था,

मुझे पता था, तुम यह कर लोगि…

और तुम्हे ऐसा रोज़ करना होगा,

मेरे लिए..

सिर्फ़ मेरे लिए… 

बेबी लव यू सो सो मच…

Khamushiya

 दूसरों की खामियों पर लज़ीज गुफ़्तगू और

  अपनी खूबियों के लम्बे जिक्र की लज्ज़त

  इस नशीले जायके से खुद को दूर रखना चाहती हूँ 

 फ़ैसले जमाने की सोच के मुताबिक़ न हो

मैं खुद पर खुद का पूरा काबू चाहती हूँ 

हर बार फ़तह सिर्फ मुझको हासिल 

हर बार खुशियों की दस्तक मेरी ही दहलीज़ पर

इस खुदगर्ज़ी से दूरी चाहती हूँ 

हर दोस्त से वफ़ा की उम्मीद 

हर रिश्तें में शीशे सी साफगोई

इस नादान ख़्वाहिश से फासला चाहती हूँ

अपनी तारीफ से खुश और ख़िलाफ़त से गमज़दा

इस राय शुमारी से बेअसर रहना चाहती हूँ

दूसरों के दर्द में पलके नम बहुतों की होती

गैर की कामयाबी पर खुश होने की तालीम चाहती हूँ

जिंदगी की लकीर तय तो सबको करनी

आखरी छोर तक खुद से खुद की जद्दोजहद चाहती हूँ

बाज़ी के दहले अपनी जेब में रखकर भी

जब्त करने का हुनर चाहती हूं

 रक़ीब को शिकस्त देने की चाह 

इस ओछी सोच का खत्मा चाहती हूँ

क्यों मेरे खतावार के शर्मिंदा होने की ख़्वाहिश रखूं

क्यों माफ़ीनामे की आरजू पालू

इन पड़ावों पर न ठहर मैं बस चलना चाहती हूँ 

आखरी साँस तक अपना क़िरदार तराशती रहूँ

 खुद को सुधारने से नही फुरसत चाहती हूँ

दूसरों की खामियों पर लज़ीज गुफ़्तगु और

अपनी खूबियों के लम्बे जिक्र की लज्ज़त

इस नशीले जायके से खुद को दूर रखना चाह

(पोस्ट शेयर करने अनुमति लेने की आवश्यकता नही है )

kya khoob likha hai kisine

आगे सफर था और पीछे हमसफर था..

रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..

मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..

ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता…

मुद्दत का सफर भी था और बरसो

 का हमसफर भी था

रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते….

यूँ समँझ लो,

प्यास लगी थी गजब की…

मगर पानी मे जहर था…

पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!

ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!

वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता!!!

सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता!!!

सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब…।। 

आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।

“हुनर” सड़कों पर तमाशा करता है और “किस्मत” महलों में राज करती है!!

“शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी, 

पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,

 वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता”..

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!

जवानी का लालच दे के बचपन ले गया….

अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ……

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा,

आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।

बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल –

“बङे हो कर क्या बनना है ?”

जवाब अब मिला है, – “फिर से बच्चा बनना है.

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी

मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली… 

बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!

भरी जेब ने ‘ दुनिया ‘ की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ‘ अपनो ‘ की.

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,

शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,

अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!

हंसने की इच्छा ना हो…

तो भी हसना पड़ता है…

कोई जब पूछे कैसे हो…??

तो मजे में हूँ कहना पड़ता है…

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों….

यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

“माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती…

यहाँ आदमी आदमी से जलता है…!!”

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,

ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,

पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा

कि जीवन में मंगल है या नहीं।

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि…

पत्थरों को मनाने में ,

फूलों का क़त्ल कर आए हम 

गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ….

वहाँ एक और गुनाह कर आए

 हम ।। 

अगर दिल को छु जाये तो शेयर जरूर करे..

एक दिन एक लड़की के पास Facebook पर एक

लड़के की friend Request आती है…

लड़के

की Pic देख कर लड़की उसे Cancel कर देती है

क्योँकि लड़के की Pic उसे पंसद नहीँ आती…

पर

लड़का बार-बार उसे Request send करता है इस

से तंग आकर लड़की उसे add कर लेती है…

अब

लड़का उसे कभी good morning..evening..

खाना खाया.. ये सब msg करने लगा…

लड़की ignor करती पर बार-बार msg करने पर

वो Reply देने लगी..

धीरे-धीरे दोनोँ बहुत अच्छे

दोस्त बन गये..

लड़के का नाम “RAJ” था… और

वो Ship पर Job करता था.. अभी वो Holidays

पर घर आया था कुछ दिनो मेँ उसे फिर से Job पर

जाना था…

दिन बीतते गये और लड़के के Ship पर

जाने का दिन भीँ आ गया… उसने जाने से पहले

लड़की को Call किया और उस से

पूछा की क्या वो उसे LOVE करती हैँ..?

लड़की ये

सुन कर चुप हो गयी..

वो उसे प्यार तो करती थी पर

अभी थोड़ा वक्त और चाहती थी.. so लड़की ने

बोला कि “मैँ तुम्हेँ Like करती हूँ… अगर तुम्हारे

जाने पर मुझेँ तुम्हारी याद आई तो मैँ वापस आने पर

तुम्हेँ जवाब दे दूँगी”..

लड़का चला गया… पूरा 1

month गुजर गया RAJ का कोई Call msg

नहीँ आया.. लड़की को उसकी बहुत याद आती…

उसका बार-बार msg करना… care करना सब उसे

बहुत याद आने लगा..

लड़की बस उसके Call

का wait करती और सोचती की इस बार वो RAJ

को बोल देगी की वो उसे बहुत प्यार करती है..

उसे

RAJ के प्यार का एहसास हो गया था…

एक दिन

बहार के नम्बर से Call आने पर उसने जल्दी से

Call उठाया..

एक लड़का बोला…. “

क्या आप

ROSHNI बोल रही है”…..?…?

मैँ RAJ का Friend

बोल रहा हूँ..

RAJ का Ship की शिडियोँ से पैर Slip

हो गया, जिस से उसके सर पर गहरी चोट लगी और

अभी 3 Days पहले उसकी Death हो गयी…

वो हमेशा कहता था कि आप उसे miss कर

रही होगी…

आप अपना ख्याल रखीयेगा RAJ की ये

ही Last wish थी” लड़की फोन रख कर बस

रोती रही..

वक्त बीत गया पर आज

भीँ वो लड़की जब Facebook open करती है

तो उसे इंतज़ार रहता है कहीँ RAJ का msg आ

जाऐ….

“खाना खाया तुमने”……?…?

इसलिए

दोस्तो..

जिस से प्यार हो उसे दिल की बात बताने मे देर न करे !!!!!

No like…… No like……

Please share only…………

किसने लिखी है पता नहीं मुझे

लेकिन एक मर्द को दर्द का एहसास कराने वाली इस लेखनी को सलाम है मेरा !!

एक बार पढ़िए 

 इस pic पे इससे बेहतर पोस्ट में कभी नहीं कर सकता

,,,,,,,,,आज मेरी माहवारी का 

दूसरा दिन है। 

पैरों में चलने की ताक़त नहीं है,

जांघों में जैसे पत्थर की सिल भरी है। 

पेट की अंतड़ियां

दर्द से खिंची हुई हैं। 

इस दर्द से उठती रूलाई

जबड़ों की सख़्ती में भिंची हुई है। 

कल जब मैं उस दुकान में 

‘व्हीस्पर’ पैड का नाम ले फुसफुसाई थी,

सारे लोगों की जमी हुई नजरों के बीच,

दुकानदार ने काली थैली में लपेट

मुझे ‘वो’ चीज लगभग छिपाते हुए पकड़ाई थी। 

आज तो पूरा बदन ही 

दर्द से ऐंठा जाता है। 

ऑफिस में कुर्सी पर देर तलक भी 

बैठा नहीं जाता है। 

क्या करूं कि हर महीने के 

इस पांच दिवसीय झंझट में,

छुट्टी ले के भी तो 

लेटा नहीं जाता है। 

मेरा सहयोगी कनखियों से मुझे देख,

बार-बार मुस्कुराता है, 

बात करता है दूसरों से, 

पर घुमा-फिरा के मुझे ही 

निशाना बनाता है। 

मैं अपने काम में दक्ष हूं। 

पर कल से दर्द की वजह से पस्त हूं। 

अचानक मेरा बॉस मुझे केबिन में बुलवाता हैै,

कल के अधूरे काम पर डांट पिलाता है। 

काम में चुस्ती बरतने का 

देते हुए सुझाव, 

मेरे पच्चीस दिनों का लगातार

ओवरटाइम भूल जाता है। 

अचानक उसकी निगाह,

मेरे चेहरे के पीलेपन, थकान

और शरीर की सुस्ती-कमजोरी पर जाती है,

और मेरी स्थिति शायद उसे 

व्हीसपर के देखे किसी ऐड की याद दिलाती है। 

अपने स्वर की सख्ती को अस्सी प्रतिशत दबाकर,

कहता है, ‘‘काम को कर लेना,

दो-चार दिन में दिल लगाकर।’’

केबिन के बाहर जाते 

मेरे मन में तेजी से असहजता की 

एक लहर उमड़ आई थी। 

नहीं, यह चिंता नहीं थी

पीछे कुर्ते पर कोई ‘धब्बा’

उभर आने की। 

यहां राहत थी

अस्सी रुपये में खरीदे आठ पैड से 

‘हैव ए हैप्पी पीरियड’ जुटाने की। 

मैं असहज थी क्योंकि 

मेरी पीठ पर अब तक, उसकी निगाहें गढ़ी थीं, 

और कानों में हल्की-सी

खिलखिलाहट पड़ी थी

‘‘इन औरतों का बराबरी का 

झंडा नहीं झुकता है

जबकि हर महीने 

अपना शरीर ही नहीं संभलता है। 

शुक्र है हम मर्द इनके 

ये ‘नाज-नखरे’ सह लेते हैं

और हंसकर इन औरतों को 

बराबरी करने के मौके देते हैं।’’

ओ पुरुषो!

मैं क्या करूं 

तुम्हारी इस सोच पर, 

कैसे हैरानी ना जताऊं?

और ना ही समझ पाती हूं

कि कैसे तुम्हें समझाऊं!

मैं आज जो रक्त-मांस 

सेनेटरी नैपकिन या नालियों में बहाती हूं,

उसी मांस-लोथड़े से कभी वक्त आने पर, 

तुम्हारे वजूद के लिए, 

‘कच्चा माल’ जुटाती हूं। 

और इसी माहवारी के दर्द से 

मैं वो अभ्यास पाती हूं,

जब अपनी जान पर खेल

तुम्हें दुनिया में लाती हूं। 

इसलिए अरे ओ मदो! 

ना हंसो मुझ पर कि जब मैं 

इस दर्द से छटपटाती हूं, 

क्योंकि इसी माहवारी की बदौलत मैं तुम्हें 

‘भ्रूण’ से इंसान बनाती हूं,,,,,,,